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الجامع لأحكام القرآن/سورة البقرة/الآية رقم 87

الجامع لأحكام القرآنسورة البقرة
الآية رقم 87
القرطبي


الآية رقم 87


الآية: 87 { وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَقَفَّيْنَا مِنْ بَعْدِهِ بِالرُّسُلِ وَآتَيْنَا عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ الْبَيِّنَاتِ وَأَيَّدْنَاهُ بِرُوحِ الْقُدُسِ أَفَكُلَّمَا جَاءَكُمْ رَسُولٌ بِمَا لا تَهْوَى أَنْفُسُكُمُ اسْتَكْبَرْتُمْ فَفَرِيقاً كَذَّبْتُمْ وَفَرِيقاً تَقْتُلُونَ }

قوله تعالى: { وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ } يعني التوراة. قوله تعالى: { وَقَفَّيْنَا } أي اتبعنا والتقفية: الإتباع والإرداف، مأخوذ من اتباع القفا وهو مؤخر العنق. تقول استقفيته إذا جئت من خلفه، ومنه سميت قافية الشعر، لأنها تتلو سائر الكلام. والقافية: القفا، ومنه الحديث: "يعقد الشيطان على قافية رأس أحدكم". والقفي والقفاوة: ما يدخر من اللبن وغيره لمن تريد إكرامه. وقفوت الرجل: قذفته بفجور. وفلان قفوتي أي تهمتي. وقفوتي أي خيرتي. قال ابن دريد كأنه من الأضداد. قال العلماء: وهذه الآية مثل قوله تعالى: { ثُمَّ أَرْسَلْنَا رُسُلَنَا تَتْرَا } [1]. وكل رسول جاء بعد موسى فإنما جاء بإثبات التوراة والأمر

بلزومها إلى عيسى عليه السلام. ويقال: رسل ورسل لغتان، الأولى لغة الحجاز، والثانية لغة تميم، وسواء كان مضافا أو غير مضاف. وكان أبو عمرو يخفف إذا أضاف إلى حرفين، ويثقل إذا أضاف إلى حرف واحد

قوله تعالى: { وَآتَيْنَا عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ الْبَيِّنَاتِ } أي الحجج والدلالات، وهي التي ذكرها الله في "آل عمران" و"المائدة"، قاله ابن عباس. قوله تعالى: { وَأَيَّدْنَاهُ } أي قويناه. وقرأ مجاهد وابن محيصن "آيدناه" بالمد، وهما لغتان. قوله تعالى: { بِرُوحِ الْقُدُسِ } روى أبو مالك وأبو صالح عن ابن عباس ومعمر عن قتادة قالا: جبريل عليه السلام. وقال حسان:

وجبريل رسول الله فينا... وروح القدس ليس به خفاء

قال النحاس: وسمي جبريل روحا وأضيف إلى القدس، لأنه كان بتكوين الله عز وجل له روحا من غير ولادة والد ولده، وكذلك سمي عيسى روحا لهذا. وروى غالب بن عبدالله عن مجاهد قال: القدس هو الله عز وجل. وكذا قال الحسن: القدس هو الله، وروحه جبريل. وروى أبو روق عن الضحاك عن ابن عباس: "بروح القدس" قال: هو الاسم الذي كان يحيي به عيسى الموتى، وقاله سعيد بن جبير وعبيد بن عمير، وهو اسم الله الأعظم. وقيل: المراد الإنجيل، سماه روحا كما سمى الله القرآن روحا في قوله تعالى: { وَكَذَلِكَ أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ رُوحاً مِنْ أَمْرِنَا } [2]. والأول أظهر، والله تعالى اعلم. والقدس: الطهارة. وقد تقدم.

قوله تعالى: { أَفَكُلَّمَا جَاءَكُمْ رَسُولٌ بِمَا لا تَهْوَى أَنْفُسُكُمُ } أي بما لا يوافقها ويلائمها، وحذفت الهاء لطول الاسم، أي بما لا تهواه.

قوله تعالى: { اسْتَكْبَرْتُمْ } عن إجابته احتقارا للرسل، واستبعادا للرسالة. وأصل الهوى الميل إلى الشيء، ويجمع أهواء، كما جاء في التنزيل، ولا يجمع أهوية، على أنهم قد قالوا في ندى أندية، قال الشاعر:

في ليلة من جمادى ذات أندية... لا يبصر الكلب في ظلمائها الطنبا

قال الجوهري: وهو شاذ وسمي الهوى لأنه يهوي بصاحبه إلى النار، ولذلك لا يستعمل في الغالب إلا فيما ليس بحق وفيما لا خير فيه، وهذه الآية من ذلك. وقد يستعمل في الحق، ومنه قول عمر رضي الله عنه في أسارى بدر: فهوي رسول الله ﷺ ما قال أبو بكر ولم يهو ما قلت. وقالت عائشة للنبي ﷺ في صحيح الحديث: والله ما أرى ربك إلا يسارع في هواك. أخرجهما مسلم.

قوله تعالى: { فَفَرِيقاً كَذَّبْتُمْ } "ففريقا" منصوب بـ "كذبتم"، وكذا { وَفَرِيقاً تَقْتُلُونَ } فكان ممن كذبوه عيسى ومحمد عليهما السلام، وممن قتلوه يحيى وزكريا عليهما السلام، على ما يأتي بيانه في "سبحان" [3] إن شاء الله تعالى.

هامش

  1. [المؤمنون: 44]
  2. [الشورى: 52]
  3. [الإسراء]
الجامع لأحكام القرآن - سورة البقرة
مقدمة السورة | 1 | 2 | 3 | أقوال العلماء في حكم الجلوس الأخير في الصلاة | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | أقوال العلماء في إمساك النبي عن قتل المنافقين | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | الآية رقم21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | طرق ما يكون به الإمام إماما | شرائط الإمام | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | مسألة الاختلاف في يوم عاشوراء | فضل صيام يوم عاشوراء | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | القول في سبب رفع الطور | 64 | 65 | 66 | 67 | مسألة الدليل على منع الاستهزاء بدين الله ودين المسلمين ومن يجب تعظيمه | 68 | 69 | 70 | 71 | مسألة الدليل على حصر الحيوان بصفاته وجواز السلم فيه بذلك | 72 | 73 | مسألة القول بالقسامة بقول المقتول دمي عند فلان أو فلان قتلني | مسألة اختلاف العلماء في الحكم بالقسامة | مسألة الاختلاف في وجوب القود بالقسامة | مسألة الموجب للقسامة اللوث ولا بد منه | مسألة الاختلاف في القتيل بوجد في المحلة التي أكراها أربابها | مسألة لا يحلف في القسامة أقل من خمسين يمينا | مسألة قصة البقرة دليل على أن شرع من قبلنا شرع لنا | 74 | 75 | 76-77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85-86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | الآبة رقم 108 | 109 | 110 | 111-112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | الآيات رقم 121-123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149-150 | 151 | 152 | 153 | 154 | 155 | 156-157 | 158 | 159 | 160 | 161 | 162 | 163 | 164 | 165 | 166 | 167 | 168 | 169 | 170 | مسألة قول العلماء قوة ألفاظ هذه الآية تعطي إبطال التقليد | 171 | 172 | 173 | 174 | 175 | 176 | 177 | 178 | 179 | 180 | 181 | 182 | 183 | 184 | 185 | 186 | 187 | 188 | 189 | 190 | 191: 192 | 193 | 194 | 195 | 196 | 197 | 198 | 199 | 200 | 201 | 202 | 203 | 204 | 205 | 206 | 207 | 208 | 209 | 210 | 211 | 212 | 213 | 214 | 215 | 216 | 217 | 218 | 219 | 220 | 221 | 222 | 223 | 224 | 225 | 226-227 | 228 | 229 | 230 | 231 | 232 | 233 | 234 | 235 | 236 | 237 | 238 | 239 | 240 | 241-242 | 243 | 244 | 245 | 246 | 247 | 248 | 249 | 250 | 251 | 252 | 253 | الآية رقم254 | 255 | 256 | 257 | 258 | 259 | 260 | 261 | 262 | 263 | 264 | 265 | 266 | 267 | 268 | 269 | 270 | 271 | 272 | 273 | 274 | الآيات رقم 275-279 | 280 | 281 | 282 | 283 | 284 | 285-286